||प्|| अकेला रहता हूँ में इधर,
ना जाने मेरा दिल हे किधर,
ना जाने मेरा दिल हे किधर,
तुम मेरी होगी तो अगर,
पास आती मुस्कुराकर,
पास आती मुस्कुराकर,
जाएँ कहीं भी हम मगर ...
जाएँ कहीं भी हम मगर ...
जाएँ कहीं भी हम मगर ...
ढूँढती हे तुम्हे हमारी नज़र ||
||च१|| जब पास हम थे, करती थी बातें,
ऐसा लगा की प्यार हे मुझसे,
आया था मिलने, ये बात कहने,
दिल ये मेरा तुम्हे चाहती हे,
तेरे बिना मुझको जीना नहीं हे,
तुझ से बढ़कर कोई नहीं हे ||अकेला ... किधर||
||च२|| सोचा था मैंने जियेंगे मिलके,
एक दुसरे के साया बनके,
जब से टूटे मेरी वो सपने,
जी रहा हूँ पत्थर जैसे,
दोस्ती का वादा तोड़ गयी वो,
मुझ को अँधेरे में छोड़ गयी वो ||अकेला ... किधर||
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